Poet Name Shayari Collection Profile Picture

Avnish Anand 'Aag'

Explore Avnish Anand 'Aag' Shayari Collection, featuring his ghazals and nazms, and experience the true beauty of Urdu poetry on Shergoi. Don’t forget to share your favorite pieces with others.

Avnish Anand 'Aag' Ghazals

कभी होती है मुझको घर से वहशत शाम के बाद
कभी पड़ती है फिर घर की ज़रूरत शाम के बाद 

ख़ुशी तो मुंतज़िर रहती है ख़ुद मेरी कि अब तो
उदासी भी लगे है ख़ूबसूरत शाम के बाद

कहीं कुछ लोग अक्सर जाते ही बाज़ार की सम्त
लगाने लगते हैं जिस्मों की क़ीमत शाम के बाद

मना करते हैं सबको मत लो रिश्वत है बुरी चीज़
मगर तुम दो तो ले लेते हैं हज़रत शाम के बाद 

कोई क्या जाने अब क्यों कट रही है आँखों में रात
बहुत दिन से है मुझको ये शिकायत शाम के बाद

मचलते मुस्कुराते हैं ये लड़के शब से पहले
बदल लेते हैं फिर क्यों अपनी सूरत शाम के बाद

नशा है ज़िंदगी का हमको तुम आकर तो देखो
कि कैसे लिखते हैं इस दिल की हसरत शाम के बाद

कोई कैसे गुज़ारे शाम-ए-उल्फ़त ग़म भुलाकर
कोई कैसे गुज़ारे शाम-ए-फ़ुर्क़त शाम के बाद

फ़क़त जो जानते हैं नाम से इक दूसरे को
कभी आते थे इनके घर पे भी ख़त शाम के बाद

उदासी ‘आग’ तुमको रास आएगी न हर रोज़
करो जाकर किसी से तुम मुहब्बत शाम के बाद
– Avnish Anand 'Aag'
हम ख़याल आशिक़ी में हैं गुलाब देखते हैं
और हम ज़िंदगी में उलझे ख़्वाब देखते हैं

यूँ तो नज़रों को चुराते हैं हम मगर ये भी है
कोई नज़रों में हो तो बे-हिसाब देखते हैं

इस तरह देखते हैं वो हसीं निगाहों से
आप मानेंगे नहीं लाजवाब देखते हैं

आप तो होंगे तलबगार मय-कदों के मगर
कुछ हैं ऐसे जो निगाह-ए-शराब देखते हैं

खुलते हैं सारे ही असरार-ए-दहर कुछ ऐसे
जब किसी को वो हटाकर नक़ाब देखते हैं

होगा क्या इश्क़-ओ-जुनूँ में हमारा मुस्तक़बिल
बात है देखने वाली जनाब देखते हैं

चाहते हम भी हैं सादा निगाह शख़्स मगर
कम हैं वो लोग जो दिल की किताब देखते हैं

छोटा सा ही सही इक कमरा है ख़मोशी भरा
हम कभी ख़ुद को जहाँ कामयाब देखते हैं
– Avnish Anand 'Aag'
ज़िंदगी की राहों में रुस्वाई का डर इस क़दर
डर निकल जाए जो मन से इस क़दर रुस्वाई हो

शाम होते ही जो आती है दरीचे से मेरे
लगता है शायद मेरी तन्हाई की परछाई हो

दास्ताँ सच्ची नहीं है मेरी तुम हैराँ न हो
हो सके तो सुन लो जो थोड़ी बहुत सच्चाई हो

देखकर नज़रें झुकी सी लगता है इन आँखों को
ये हया-ओ-ज़र्फ़ मेरी पलकों ने पहनाई हो

सोचिए मत मेरे बारे में कि शायद आपके
सोच से भी गहरी मेरे दिल की ही गहराई हो

लौटकर आते नहीं अब गुज़रे दिन तो लगता है
अहद-ए-हाज़िर के ग़मों से ख़ुशियों की भरपाई हो
– Avnish Anand 'Aag'
If you enjoyed this Avnish Anand 'Aag' Shayari Collection, don’t forget to explore other poets and themed collections available on our website. We regularly update our library with meaningful ghazals, nazms, and sher for true poetry lovers.